स्वगत भाषण http://translate.google.co.in/translate?hl=hi-IN&langpair=en|hi&u=http://en.wikipedia.org/wiki/Monologue उदाहरण मैकबेथ की एकालाप कल और कल और कल वह सीखता है कि बाद लेडी मैकबेथ खुद को मार डाला गया है: वह इसके बाद मर जाना चाहिए था; इस तरह के एक शब्द के लिए एक समय हो गया होता. कल, और कल, और कल, , दिन से दिन के लिए इस क्षुद्र गति में ढोंगी रिकॉर्ड समय के अंतिम अक्षर के लिए; और हमारे सभी कल मूर्खों रोशन किया है धूल मौत के लिए रास्ता. बाहर, बाहर, संक्षिप्त मोमबत्ती! जीवन की लेकिन एक चलने छाया, एक गरीब खिलाड़ी यही struts और मंच पर अपने घंटे frets और फिर कोई और अधिक सुना है. यह एक कहानी है ध्वनि और क्रोध से भरा एक मूर्ख ने बताया कुछ भी नहीं वाचक -. मैकबेथ (5 अधिनियम, दृश्य 5, लाइनों 17-28) http://streevimarsh.blogspot.in/2009/01/blog-post_17.html
चांद और कवि / रामधारी सिंह "दिनकर" रात यों कहने लगा मुझसे गगन का चाँद, आदमी भी क्या अनोखा जीव होता है! उलझनें अपनी बनाकर आप ही फँसता, और फिर बेचैन हो जगता, न सोता है। जानता है तू कि मैं कितना पुराना हूँ? मैं चुका हूँ देख मनु को जनमते-मरते; और लाखों बार तुझ-से पागलों को भी चाँदनी में बैठ स्वप्नों पर सही करते। आदमी का स्वप्न? है वह बुलबुला जल का; आज उठता और कल फिर फूट जाता है; किन्तु, फिर भी धन्य; ठहरा आदमी ही तो? बुलबुलों से खेलता, कविता बनाता है। मैं न बोला, किन्तु, मेरी रागिनी बोली, देख फिर से, चाँद! मुझको जानता है तू?